इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

Read more: इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

शिवरात्रि शिव को बहुत ही प्रिय है जिस कारण इसे शिव रात्रि कहा जता है | इस दिन महादेव करोड़ों सूर्य के सामान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए  | सर्वप्रथम भगवान विष्णु और ब्रम्हा ने इस लिंग की पूजा की थी | इसलिए महाशिवरात्रि को भगवन भोले शंकर की जन्म दिन के रूप में जानते हैं |

कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान् शिव का विवाह हुआ था | शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से ही प्रचलित है | हिन्दू पुराणों में हमें शिवरात्रि व्रत का उल्लेख मिलता है , देवी लक्ष्मी , इन्द्रानी , सरस्वती , गायत्री , सावित्री , सीता , पार्वती , और रति ने भी शिवरात्रि  का व्रत किया था |

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी की तिथि में चन्द्रमा सूर्य के बहुत ही नजदीक होता है | इस प्रकार जीवन रूपी चंद्रमा का शिव रूपी सूर्य के साथ मिलन होता है | अतः इस चतुर्दशी को शिव पूजा करने से लोगों को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है | यही शिवरात्रि का महत्व है |

शिव पार्वती का विवाह

पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि ही वह दिन है जब भगवान शिव ने  पार्वती से विबाह रचाया था |

शिवरात्रि व्रत की महिमा

Read more: इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

इस व्रत के बारे में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को करता है ,  वह सभी भोगों को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्ति होती है | महा शिवरात्रि के दिन भगवान् शिव मानव जाति के नजदीक आ जाते हैं |मध्य रात्रि में शिव मनुष्य के सबसे निकट रहते हैं इस कारण लोग रातभर जागते रहते हैं |

इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं | १४ वर्ष लगातार व्रत करने के बाद इसका उद्यापन कर देना चाहिए |

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि व्रत का महत्व

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है | अविवाहित महिलायें भगवान् शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें शिव जैसा ही पति मिले | जबकि विवाहित महिलायें अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं | महाशिवरात्रि के साथ कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं | इसके महत्व को  समझने  के लिए पौराणिक कथाओं को जानना होगा |

गरुड़ पुराण में कथा

सुन्दरसेनक निषादों का राजा था जो आबू पर्बत पर रहता था | एक दिन वह अपने कुत्तों के साथ शिकार खेलने गया | लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला | भूख प्यास से व्याकुल होकर वह घने जंगल में एक तालाब के किनारे बैठा  रहा |

पेड़ के किनारे एक बेल का पेड़ था जिसके नीच एक शिवलिंग भी था | शिवलिंग बेल पत्रों से ढका हुआ था | अपने शरीर को आराम देने के लिए अनजाने में शिवलिंग पर से बेल पत्रों को हटा दिया | तालाब से जल लाकर उसने अपना पैर धोया | जिससे जल की कुछ बूंद शिवलिंग पर भी पड़ी  |

उसका एक तीर भी शिवलिंग पर गिरा जिसे उठाने के क्रम में उसके हाथों से शिवलिंग का स्पर्श भी हुआ | इस प्रकार अनजाने में ही उसने शिवलिंग को नहलाया , छूआ और उसकी पूजा की |इसके बाद दुसरे दिन वह घर वापस लौट आया  और  भोजन किया |

जब उसकी मृत्यु हुई तो यमदूत उसे पकड़ कर यमलोक ले जाने लगे | लेकिन शिव दूतों ने यमदूतों को रोका | उनसे युद्ध कर उन्होंने सुन्दरसेनक को छुड़ाया |

अनजाने में ही पूजा करने के कारण वह पाप मुक्त हो गया | तबसे वह  शिव का सेवक बन गया पुन्य फल को प्राप्त किया |ऐसे में  कोई भी व्यक्ति ज्ञान में शिव की पूजा पाठ करे तो वह अवश्य ही पुन्य का भागी बनता है |

शिवरात्रि के ही दिन हुआ था समुद्र मंथन

Read more: इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

सभी पौराणिक कथाओं में नीलकंठ की कहानी ज्यादा प्रचलित है | मान्यता है कि शिवरात्रि के ही दिन समुद्र मंथन हुआ था |

उसी क्रम में समुद्र से कालकेतु विष निकला था | विष के ताप से पूरा संसार जलने लगा था | भगवान् शिव ने पूरे ब्रम्हांड की रक्षा के लिए स्वयं ही सारा विष पी लिया था | जिसके परिणामस्वरूप उनका गला नीला  हो गया और वे नीलकंठ कहलाये |

स्कन्द पुराण में कथा

कहते हैं चंड नामक एक दुष्ट व्यक्ति था | उसकी पत्नी भी दुष्ट थी | वह मछली पकड़ने का काम करता था |साथ ही वह बहुत से पशु पक्षियों का भी शिकार करता था | एक दिन वह एक पात्र में जल लेकर एक बेल की वृक्ष पर बनैले शुगर का शिकार करने के लिए चढ़ गया |

बनैले शुगर की प्रतीक्षा में वह पेड़ पर रात भर जागता रहा और बेल तोड़-तोड़ कर नीचे फेकने लगा | पेड़ के नीचे शिवलिंग था | उस पर भी  बेल पत्र गिरा | पात्र के जल से उसने मुंह धोया तो जल नीचे शिवलिंग पर भी गिरा | इस प्रकार उसने सभी तरह से शिव की पूजा की और रात भर पेड़ पर जागता रहा , और कुछ नहीं खाया | फिर सुबह होने पर वह पुनः नदी में मछली पकड़ने चला गया | रात में घर नहीं जाने कारण उसकी पत्नी भी भूखे पेट सो गयी | सुबह होने पर पति के लिए भोजन लेकर वह चली | पति को नदी किनारे देख कर वह भोजन को नदी तट पर रख कर नदी पार करने लगी |

दोनों ने नदी में स्नान किया और भोजन करने हेतु चले | लेकिन इतने देर में उनका भोजन एक कुता चट कर गया | पत्नी ने कुत्ते को मारना चाहा , लेकिन पति ने ऐसा करने से मना कर दिया | उनका हृदय पसीज गया था |तब शिवदूत शिवपुरी से उस पति पत्नी को लेने के लिए आ गए | क्योंकि उन्होंने अनजाने में ही शिव की पूजा कर ली थी |

क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

Read more: क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

हिन्दू पंचांग एवं वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार एक ही राशि में एक महीना तक सूर्य का रहना अर्थात जब सूर्य के १२ राशियों का भ्रमण करते हुए वृहस्पति , धनु और मीन राशियों में पहुँचते हैं तो इस दिन से अगले ३० दिनों की समय को खरमास कहा जाता है |

ख़ास कर उत्तर भारत के लोग खरमास का पालन करते हैं | झारखंड , उत्तरप्रदेश और बिहार के लोग खरमास महीना का अनुपालन करते हैं | भारत के पूर्वी , दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों के लोग खरमास को नहीं मानते हैं | दक्षिण भारत के पंचांग के अनुसार इसे मर्गझी महीना कहते हैं | जो अध्यात्मिकता सम्बन्धी वस्तुओं के लिए काफी फायदेमंद होता है |

ऐसे कार्य हैं वर्जित

ऐसी मान्यता है कि खरमास के दिनों में शुभ कार्य अर्थात इन दिनों में मांगलिक कार्य , उपनयन , मुंडन , भवन निर्माण , नया निवेश या व्यवसाय शुरू  करना , नयी जमीन - जायदाद खरीदना अशुभ माना गया है |अतः यह कार्य नहीं करना चाहिए |

तो क्या करें इस काल में ?

खरमास के दिनों में सिर्फ भगवत भजन , पूजा पाठ ही किया जाता है | खरमास के दिनों में पूजा-पाठ , यग्य , हवन एवं अनुष्ठान करना , गरीब लोगों को दान देना , भोजन कराना , वस्त्र दान करना शुभ माना गया है |

दो बार आता है खरमास

साल में दो बार खरमास आता है | खरमास के दौरान पृथ्वी से सूर्य तक  की दूरी सबसे अधिक होती है|  खरमास के दौरान सूर्य का रथ घोड़े के स्थान पर गधे का हो जाता है | इन गधों को ही खर कहा जाता है | अतः इसे खरमास कहा जाता है | जब सूर्य वृश्चिक राशि में से धनु राशि में जाता है तो  यह धनु की संक्रांति कहलाता है | जिसे मलमास भी कहा जाता है |

क्या कहती है मान्यताएं

खरमास के दिनों  में लोगों को सामूहिक रूप से रामायण कथा और भगवत कथा सुनना चाहिए | भागवत पुराण के आनुसार जिस व्यक्ति की मृत्यु खरमास अर्थात पौष माह में होता है तो वह नरक का भागी बनता है |

इस बात की पुष्टि माहाभारत से होती है कि जब अर्जुन ने भीष्म पितामह को धर्म युद्ध में वाणों से मारा था तो वह समय भी खरमास ही था | इसलिए सैकड़ों बानों से घायल होने बावजूद भी भीष्म पितामह ने प्राण नहीं त्यागे थे | क्योंकि  यदि वे खरमास में प्राण त्यागते तो उनका अगला जन्म नर्क में ही होता |

मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

मिथिला की कुछ स्त्रियों का प्राचीन ग्रंथों और इतिहास की पुस्तकों में अक्सर नाम उल्लेखित रहता है | इन स्त्रियों ने  अपने ज्ञान से न केवल मिथिला अपितु संपूर्ण भारतवर्ष का नाम इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया है | आईये जानतें हैं की ये  कौन थीं ?

1 गार्गी वाचकनवी

Read more: मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

महर्षि वचक्नु  की पुत्री वाचकन्वी वेदों और उपनिषदों के उच्च स्तरीय ज्ञान के कारण इतिहास में बहुत प्रसिद्द हैं | गर्ग गोत्र में उत्पन्न होने के कारण उन्हें ‘ गार्गी’ नाम से भी जाना जाता है | गार्गी  का राजा जनक के दरबार में  महर्षि याज्ञवल्लभ के साथ किया गया शास्त्रार्थ बहुत मशहूर है | विजेता तो याज्ञवल्लभ ही रहे किन्तु हार कर भी जीतकर ‘गार्गी’  का नाम  मिथिला में  स्त्री शक्ति का प्रतीक बनी |

आजन्म ब्रह्मचारिणी रहीं गार्गी का उल्लेख ‘अश्वलायन गृह्य सूत्र ‘   और ‘चंदोग्य उपनिषद्’ में भी प्राप्त होता है | ऋगवेद में उनके छंद ब्रह्मवादिनी के नाम से प्रस्तुत हैं | अपनी महान  उपलब्धियों के कारण वे जनक के दरबार के नवरत्नों में से एक थीं |

2 विद्योत्तमा

Read more: मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

कालिदास को ‘  महाकवि ’  बनाने वालीं , विद्योत्तमा ,    काशी नरेश विक्रमादित्य की पुत्री थी | वह परम सुंदरी और विदुषी नारी थी | बड़े बड़े विद्वानों को हराने वाली विद्योतामा को एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत ‘मौन शास्त्रार्थ ’  द्वारा कुंठित विद्वानों नें काली दास जो कि एक महामुर्ख थे के साथ करा दिया |

कालिदास द्वारा रचित ‘ कुमार संभव ‘ के अपूर्ण अंशों को विद्योत्तमा ने ही बाद में पूरा किया | संस्कृत की एक और महाकाव्य ‘ रघुवंश’ को का भी संपादन विद्योत्तमा द्वारा किया गया | 

3 लखिमा देवी

Read more: मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

लखिमा देवी मिथिला के एक पराक्रमी राजा शिव सिंह रूप नारायण की पत्नी थी | इस  परम विदुषी नारी  को  न्याय और धर्म शास्त्र में पांडित्य प्राप्त थी | अपने पति की युद्ध में  मृत्य के बाद उन्होंने १५१३ई० तक मिथिला पर शासन किया था | इतिहासकारों  मत हैं  कि लखिमा रानी के बाद ओईनवार वंश नेतृत्वविहीन हो गया |रानी लखिमा कठिन प्रश्नों का उत्तर जानने हेतु समय- समय पर पंडितों की महासभा आयोजित करती थी |

लखिमा देवी का निर्णय अदभूत और शानदार माना जाता था | उन्होंने  ‘ पदार्थ चन्द्र’ , ‘विचार चन्द्र’ एवं ‘मिथक्षरा वाख्यान’ नामक पुस्तक की रचना की | महाकवि विद्यापति द्वारा रचित लगभग २५० गीतों में उनका वर्णन है |

4 भारती

Read more: मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

भारतीय धर्म दर्शन को सबसे शिखर पर पहुंचाने वाले आदि शंकराचार्य एक साधारण लेकिन बुद्धिमान औरत से एक बहस में हार गए थे | वो महिला थीं ‘भारती’  जो  मिथिला  के महाविद्वान मंडन मिश्र की पत्नी थीं  |

विदुषी एवं सुंदर  ‘भारती’ ने  २२ वर्ष की अवस्था में ही भारती ने चारों वेद , शिक्षा , कल्प , व्याकरण , ज्योतिष , सांख्य , न्याय मीमांशा , धर्मशास्त्र और साहित्यों का अध्ययन कर लिया था | स्वर से कोमल एवं मधुर भारती की प्रतिभा को देखकर ही  विद्वानों ने उसे सरस्वती का अवतार मान लिया था |

5 मैत्रेयी

Read more: मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

‘मैत्रेयी’ मिथिला के राजा जनक के दरबार में मैत्री नाम के एक मंत्री की पुत्री  थीं | मैत्रेयि निश्छल , निःस्वार्थ , साध्वी प्रवृति की स्त्री थीं जिन्हें अध्यात्मिक ज्ञान की केवल अभिलाषा थी | इसी कारण उन्हें महर्षि याज्ञवल्क्य जिनकी वह दूसरी पत्नी थीं , का , स्नेह प्राप्त था |

महर्षि याज्ञवल्क्य नें मैत्रेयी को ब्रम्हज्ञान का उपदेश दिया जिस कारण मैत्रेयी नारी से नारायणी हो गयी  और वह श्रेष्ठ नारी के रूप में प्रसिद्ध हो गयी | मैत्रेयी ने मैत्रेयी उपनिषद लिखा और वृहद्नारायका उपनिषद में हिन्दू धर्मं की एक महवपूर्ण अवधारणा ‘ आत्मा’  पर विशेष प्रकाश डाला है |

कैसा पड़ेगा मकर संक्रान्ति 2017 का आपकी राशि पर प्रभाव !

Read more: कैसा पड़ेगा मकर संक्रान्ति 2017 का आपकी राशि पर प्रभाव !

वर्ष 2017  में मकर संक्रांति १४ जनवरी शनिवार के दिन मनाया जाएगा | सूर्य के मकर राशि आने के परिणाम स्वरूप  भ्रष्टाचार , अपराध , राजनितिक उथल-पुथल में वृद्धि होगी | शनि सूर्य को अपना शत्रु मानते हैं , लेकिन सूर्य शनि को अपना शत्रु नहीं मानते हैं | पुत्र कैसा भी हो – माता- पिता के लिए वह प्रिय ही रहता है |

इस मकर संक्रांति के दिन  शुभ समय है सुबह ७ बजकर ३८ मिनट से लेकर दोपहर २ बजकर २ मिनट तक |  इस समय के बीच स्नान- दान करने से लोगों को पुन्य मिल सकता है |

मकर राशि में सूर्य इस वर्ष १४ जनबरी से लेकर १२ फरबरी तक रहेंगे | अर्थात सूर्य एक महीने तक मकर राशि में रहेंगे | इसी  हफ्ते की शुरुआत लोहिड़ी और मकर संक्रांति के साथ हो रही है |  शरीर में उष्मा भरने बाला यह त्यौहार प्रेमियों के बीच प्रेम भाव को बढ़ा और घटा भी सकता है |

जानिये इसबार संक्रान्ति का  १२ राशियों पर सूर्य का कैसा प्रभाव रहेगा

मेष राशि

मेष राशि वाले व्यक्ति के लिए धन , प्रतिष्ठा एवं कीर्ति में वृद्धि होगी राज दरबार में उनका सम्मान होगा , जो भी कार्य वे शुरू करेंगे उनमे उन्हें सफलता मिलेगी | मेष राशि वाले स्त्री या पुरुष यदि प्रेम शुरू करना चाहते हैं तो उनके लिए इस सप्ताह का आरम्भकाल और अंतकाल अनुकूल रहेगा |

कार्य क्षेत्र में अपने अधिकारियों से तालमेल बनाकर रखना होगा , नहीं तो फरबरी में परेशानी बढ़ सकती है |जनबरी के अंतिम सप्ताह से साढ़ेसाती दूर हो जायेगी | लेकिन सूर्य और शनि के द्वादश योग के कारण कुछ दिनों तक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक उलझन बनी रह सकती है |

वृष राशि

वृष राशि वाले लोग अकारण तनाव में रहेंगे | उन्हें रोग , शोक ,  भय एवं लम्बी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है | इस राशि वाले लोगों को अकारण धन की हाँनि हो सकती है | इन्हें अपने पिता या बरिष्ठ जनों से लाभ मिल सकता है |

इस राशि बाले लोगों को २६ जनबरी से साढ़ेसाती का जोग बन रहा है जो उलझन पैदा कर सकता है |

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए यह मकर संक्रांति प्रतिकूल है | बिगड़ सकती है आपकी स्वास्थ्य |कार्य क्षेत्र में काम का दबाब बना रहेगा | आपके राशि में स्वामी बुध फरबरी के प्रथम सप्ताह में आ जायेंगे , जिससे बौद्धिक कार्यों में प्रगति होगी |

कर्क राशि

इस राशि के लोगों का जीवन साथी से मतभेद हो सकता है | क्योकि मकर संक्रांति का प्रभाव अच्छा नहीं है  | आपकी स्वास्थ्य बिगड़ सकती है |अपना सोच सकारात्मक रखना होगा | साथ ही विरोधियों से सतर्क रहना होगा |

सिंह राशि

सिंह राशि वाले लोगों पर मकर संक्राति के प्रभाव के कारण शत्रुओं पर विजय होगा , आय बढ़ेगी एवं ऋण रोग से मुक्ति मिलेगी | आपके राशि से छठे सूर्य का गोचर रहने से आपको यात्रा करवा सकता है | किसी बात को लेकर आप ज्यादा चिंतित रह सकते हैं जो आपके लिए अनिद्रा का कारण बन सकता है |

कन्या राशि

इस राशि के छात्र अध्ययन में कठिन परिश्रम करेंगे तभी सफलता मिल सकती है | इस राशि के लोग धर्म-कर्म में ज्यादा रूचि दिखाएँगे | इन्हें नौकरी या व्यवसाय का नया अवसर मिलेगा | इसलिए आपको अवसर का लाभ उठाना चाहिये | आपको सन्तान पक्ष से तनाव , शिक्षण कार्य में बाधा ,हो सकता है |इसके साथ ही धन का भी अभाव हो सकता है |

तुला राशि

तुला राशि वाले लोगों पर मकर संक्रांति का प्रभाव अच्छा नहीं है | उन्हें अनावश्यक भाग-दौड़ , पारिवारिक कलह एवं सामाजिक कार्यों में धन का व्यय हो सकता है |नौकरी- व्यवसाय में पूर्व में किये गए प्रयास लाभ दायक होगा |सुख के साधन प्राप्त हो सकते हैं |आपका स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा |

वृश्चिक राशि

भाई बंधुओं से ताल मेल बनाए रखें नहीं तो कष्ट हो सकता है |आप जीवन के विभिन्न क्षेत्रो से सम्बन्धित महत्वपूर्ण फैसले ले सकते हैं | आप पर साढ़े साती का प्रभाव लगा रहेगा | इसलिए आपको जो कुछ मिलेगा इसलिए आपको काफी परिश्रम काना पड़ेगा | आपको धन , मान प्रतिष्ठा में वृद्धि , पदोन्नति और सुख सुविधा के साधन प्राप्त होंगे |

धनु राशि

धनु राशि वालों को धन सम्पति को लेकर पारिवारिक कलह , अनावश्यक धन व्यय और वाद –विवाद  होने की सम्भावना है |आपको मानसिक परेशानी और उलझन की स्थिति बनी रहेगी | सगे-सम्बन्धियों से ताल- मेल बना कर रखे | नहीं तो इनसे मतभेद हो सकता है |

मकर राशि

इस महीने आपकी साढ़ेसाती शुरू हो रही है | लेकिन सूर्य के अनुकूल रहने से इस महीने आपकी मेहनत और प्रयास का फल अच्छा मिलेगा |  आपको कहीं से लाभ भी मिल सकता है |प्रवास , शारीरिक कष्ट , बनते कार्यों में बाधा , धन व्यय और चिंता परेशान करेगी |

कुम्भ राशि

पारिवारिक सुख में कमी , अनावश्यक व्यय , आग से  भय , कार्यों में बाधा बनी रहेगी | भागदौड़ की स्थिति बनी रहेगा | शरीर में थकान और और आँखों में नींद की समस्या रहेगी |आप कहीं घुमने की योजना बना सकते हैं | अपने विरोधियों से सावधान रहें |

मीन राशि

आपके सम्मान बृद्धि , पदोन्नति ,एवं रुके हुए कार्य सम्पन्न होगे |

Latest Articles

इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

Shivratri is associated with many stories of Lord Shiva

शिवरात्रि शिव को बहुत ही प्रिय है जिस कारण इसे...

क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

Kharmas is observed in Mithila twice a year

हिन्दू पंचांग एवं वैदिक ज्योतिष की गणना के...

मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

Gargi was a famous Indian women philospher who was from Mithila

मिथिला की कुछ स्त्रियों का प्राचीन ग्रंथों और...

Most Read Articles

क्यों प्रसिद्ध है कोइलख ग्राम मिथिला की काशी के रूप में !

Bhadrakali Kokilakshi Temple in Koilakh Village of Madhubani

मधुबनी जिलान्तर्गत कोइलख गॉव राजनगर प्रखंड में...

कैसे जुझारपुर बना झंझारपुर !

कभी दरभंगा महाराज को आश्रय देनेवाला - झंझारपुर...

दरभंगा महाराज के पास था विश्वस्तरीय जवाहरातों का संग्रह!

King Rameshwar Singh of Darbhanga  had the unique Naulakha haar

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को अनमोल जवाहरातों...