इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

Shivratri is associated with many stories of Lord Shiva

शिवरात्रि शिव को बहुत ही प्रिय है जिस कारण इसे शिव रात्रि कहा जता है | इस दिन महादेव करोड़ों सूर्य के सामान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए  | सर्वप्रथम भगवान विष्णु और ब्रम्हा ने इस लिंग की पूजा की थी | इसलिए महाशिवरात्रि को भगवन भोले शंकर की जन्म दिन के रूप में जानते हैं |

कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान् शिव का विवाह हुआ था | शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से ही प्रचलित है | हिन्दू पुराणों में हमें शिवरात्रि व्रत का उल्लेख मिलता है , देवी लक्ष्मी , इन्द्रानी , सरस्वती , गायत्री , सावित्री , सीता , पार्वती , और रति ने भी शिवरात्रि  का व्रत किया था |

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्णपक्ष चतुर्दशी की तिथि में चन्द्रमा सूर्य के बहुत ही नजदीक होता है | इस प्रकार जीवन रूपी चंद्रमा का शिव रूपी सूर्य के साथ मिलन होता है | अतः इस चतुर्दशी को शिव पूजा करने से लोगों को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है | यही शिवरात्रि का महत्व है |

शिव पार्वती का विवाह

पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि ही वह दिन है जब भगवान शिव ने  पार्वती से विबाह रचाया था |

शिवरात्रि व्रत की महिमा

Ekadash Rudra Mahadev madhubani Bihar

इस व्रत के बारे में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को करता है ,  वह सभी भोगों को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्ति होती है | महा शिवरात्रि के दिन भगवान् शिव मानव जाति के नजदीक आ जाते हैं |मध्य रात्रि में शिव मनुष्य के सबसे निकट रहते हैं इस कारण लोग रातभर जागते रहते हैं |

इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं | १४ वर्ष लगातार व्रत करने के बाद इसका उद्यापन कर देना चाहिए |

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि व्रत का महत्व

महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है | अविवाहित महिलायें भगवान् शिव से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें शिव जैसा ही पति मिले | जबकि विवाहित महिलायें अपने पति और परिवार के लिए मंगल कामना करती हैं | महाशिवरात्रि के साथ कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं | इसके महत्व को  समझने  के लिए पौराणिक कथाओं को जानना होगा |

गरुड़ पुराण में कथा

सुन्दरसेनक निषादों का राजा था जो आबू पर्बत पर रहता था | एक दिन वह अपने कुत्तों के साथ शिकार खेलने गया | लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला | भूख प्यास से व्याकुल होकर वह घने जंगल में एक तालाब के किनारे बैठा  रहा |

पेड़ के किनारे एक बेल का पेड़ था जिसके नीच एक शिवलिंग भी था | शिवलिंग बेल पत्रों से ढका हुआ था | अपने शरीर को आराम देने के लिए अनजाने में शिवलिंग पर से बेल पत्रों को हटा दिया | तालाब से जल लाकर उसने अपना पैर धोया | जिससे जल की कुछ बूंद शिवलिंग पर भी पड़ी  |

उसका एक तीर भी शिवलिंग पर गिरा जिसे उठाने के क्रम में उसके हाथों से शिवलिंग का स्पर्श भी हुआ | इस प्रकार अनजाने में ही उसने शिवलिंग को नहलाया , छूआ और उसकी पूजा की |इसके बाद दुसरे दिन वह घर वापस लौट आया  और  भोजन किया |

जब उसकी मृत्यु हुई तो यमदूत उसे पकड़ कर यमलोक ले जाने लगे | लेकिन शिव दूतों ने यमदूतों को रोका | उनसे युद्ध कर उन्होंने सुन्दरसेनक को छुड़ाया |

अनजाने में ही पूजा करने के कारण वह पाप मुक्त हो गया | तबसे वह  शिव का सेवक बन गया पुन्य फल को प्राप्त किया |ऐसे में  कोई भी व्यक्ति ज्ञान में शिव की पूजा पाठ करे तो वह अवश्य ही पुन्य का भागी बनता है |

शिवरात्रि के ही दिन हुआ था समुद्र मंथन

Samudra Manthan was started on the day of Shivratri

सभी पौराणिक कथाओं में नीलकंठ की कहानी ज्यादा प्रचलित है | मान्यता है कि शिवरात्रि के ही दिन समुद्र मंथन हुआ था |

उसी क्रम में समुद्र से कालकेतु विष निकला था | विष के ताप से पूरा संसार जलने लगा था | भगवान् शिव ने पूरे ब्रम्हांड की रक्षा के लिए स्वयं ही सारा विष पी लिया था | जिसके परिणामस्वरूप उनका गला नीला  हो गया और वे नीलकंठ कहलाये |

स्कन्द पुराण में कथा

कहते हैं चंड नामक एक दुष्ट व्यक्ति था | उसकी पत्नी भी दुष्ट थी | वह मछली पकड़ने का काम करता था |साथ ही वह बहुत से पशु पक्षियों का भी शिकार करता था | एक दिन वह एक पात्र में जल लेकर एक बेल की वृक्ष पर बनैले शुगर का शिकार करने के लिए चढ़ गया |

बनैले शुगर की प्रतीक्षा में वह पेड़ पर रात भर जागता रहा और बेल तोड़-तोड़ कर नीचे फेकने लगा | पेड़ के नीचे शिवलिंग था | उस पर भी  बेल पत्र गिरा | पात्र के जल से उसने मुंह धोया तो जल नीचे शिवलिंग पर भी गिरा | इस प्रकार उसने सभी तरह से शिव की पूजा की और रात भर पेड़ पर जागता रहा , और कुछ नहीं खाया | फिर सुबह होने पर वह पुनः नदी में मछली पकड़ने चला गया | रात में घर नहीं जाने कारण उसकी पत्नी भी भूखे पेट सो गयी | सुबह होने पर पति के लिए भोजन लेकर वह चली | पति को नदी किनारे देख कर वह भोजन को नदी तट पर रख कर नदी पार करने लगी |

दोनों ने नदी में स्नान किया और भोजन करने हेतु चले | लेकिन इतने देर में उनका भोजन एक कुता चट कर गया | पत्नी ने कुत्ते को मारना चाहा , लेकिन पति ने ऐसा करने से मना कर दिया | उनका हृदय पसीज गया था |तब शिवदूत शिवपुरी से उस पति पत्नी को लेने के लिए आ गए | क्योंकि उन्होंने अनजाने में ही शिव की पूजा कर ली थी |

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