The stuffs used in the worship

मधु-श्रावणी हैं मिथिला में नव वर-वधु का पर्व

आलेख

मिथिलांचल में , मैथिल ब्राम्हण परिवार कि नव-विबाहित कन्यायें अपने पति के साथ मधुश्रावणी पर्व मनाती हैं | इस दिन नव विवाहित दम्पति एकसाथ नाग देवता कि पूजा करते हैं | १३ दिन का यह अनुष्ठान श्रावण माह के पहले पखवाड़े के पंचमी तिथि से लेकर द्वितीय पखवाड़े के तृतीया तिथि तक मनाई जाती है |

क्या किया जाता है इस दिन ?

The stuffs used in the worship

नव विवाहित कन्या १२ दिन तक यह अनुष्ठान करती है | जबकि  १३ वें दिन जिसे मधुश्रावणी का दिन भी कहा जाता है ,  वह कन्या अपने पति के साथ यह अनुष्ठान करती हैं |

मधुश्रावणी के दिन से ही नव-विवाहित लडकियां सांसारिक जीवन में प्रवेश करती है |

प्रतिदिन करतें है फूलों का संग्रह !

Picking up flowers from a garden is a daily evening ritual in Madhu-Shravani

ये लड़कियाँ , दुल्हन के कपड़े में प्रथम दिन से लेकर १२ दिनों तक अपनी सहेलियों के साथ बगीचे में जाती हैं और मौसमी फूलों , बांस एवं अन्य पेड़ कि पत्तियों को संग्रह कर बॉस कि बनी हुई टोकड़ी में सजाकर रखती हैं |

शिव-गौरी के साथ नाग की पूजा

The worship of snake god in Madhushravani

नवव्याहताएँ नाग देवता एवं भगवान् शिव- गौरी की पूजा प्रतिदिन करती हैं | बुजुर्ग महिला १२ दिनों तक मधुश्रावणी कि कथा सुनाती हैं |

ये कथाएं धार्मिक उपाख्यानों से भरी परी हैं जो इन लड़कियों को अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित होना सिखाती है |

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