क्या था मिथिला की रहस्यमय प्राचीन नगरी बलिराज गढ़ में !

आलेख


बलिराजगढ़ मधुबनी रेलवे स्टेशन से पूरब उत्तर की दिशा में ३४ किलोमीटर की दूरी पर झझारपुर स्टेशन के उत्तर दिशा की दुरी पर,बड़हरा रेलवे हॉल्ट से ४ किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित है। भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार बलिराजगढ़ का क्षेत्रफल १७५ एकड़ है। बाहर से बलिराजगढ़ प्राचीनकालीन खंडहर सा लगता है। बलिराजगढ़ लगभग मध्य भाग में एक काफी प्राचीन तालाब भी है। जिसका निर्माण स्व० नारायण दास नामक संत के द्वारा करवाया गया था।

बलिराजगढ़ की परिसीमा

The mysterious city Balirajharh is waiting to be explored

बलिराजगढ़ की परिसीमा जो बाहर से देखने में तटबंध सी लगती है,वह वस्तुतः एक चहारदीवारी का भग्नावशेष है। चारों दीवारों के मध्य में दो-दो उँची उँची जगह देखने में आती है। इसके बीच में खाली जगह दिखाई पड़ती है। ऐसा लगता है कि इन दोनों उँची जगहों पर प्रवेश-द्वार के प्रहरी का मकान था और इन दोनों प्रहरी मकानों के मध्य दरवाजा था।  बलिराजगढ़ के प्रत्येक कोने पर भी समतल जमीन से बहुत उँची मीनार सी ईंट निर्मित बनावट है। पुरातत्व सर्वेक्षण  से ऐसा प्रतीत हुआ कि यह उँची जगह जो चहारदीवारी के कोनों पर दिख पड़ती है सम्भवतः मीनार रही होगी मीनार के ऊपरी भाग में कमरा रहा होगा जिसमें विशेष प्रकार के सुरक्षाकर्मी प्रहरी का कार्य करते होंगे।

 

उत्खनन कार्य के क्रम में

Earthen utensils have been excavated at Balirajgarh by ASI

उत्खनन कार्य करने के क्रम में वर्तनों के बहुत से टूटे-फूटे अवशेष मिले जिस पर अनेक प्रकार की चित्रकला प्रदर्शित थी। मिटटी के वर्तनों के अतिरिक्त किसी प्रकार के धातु के वर्तन नहीं मिले थे। इससे सिद्ध होता है उस  समय लोग धातु युग में प्रवेश नहीं कर पाये थे। उत्खनन कार्य के फलःस्वरूप काफी मात्रा में कीमती पत्थर  मिले थे जिनका मूल्य १९६२ ई ० में ४५००० हजार रुपया निर्धारित किया गया था।

अश्त्र के साक्ष्य

Balirajgarh is ancient city believed to be the kingdom of King Bali

खुदाई कार्य से पुरातत्व विभाग के पदाधिकारियों को बलिराजगढ़ में तीन अश्त्र भी प्राप्त हुए थे जिनमे जंग नहीं लगा हुआ था  वे बहुत कठोर और मजबूत मालुम पड़ते थे। इससे यह स्पस्ट होता है कि शत्रुओं से अपनी सुरक्षा के लिए और शिकार करने के लिए उस समय के मनुष्य भी तीर-धनुष भी व्यवहार करते थे। बलिराजगढ़ के मध्य में स्थित उँची जगह की खुदाई करने पर अनेक छोटी-छोटी कोठरियां मिली। इन कोठरियों में बहुत छोटी और पतली ईंट का प्रयोग किया गया है। अनेक कोठरी  इतनी छोटी हैं कि उनमें दो व्यक्तियों को भी खड़ा होने में दिक्कत हो सकती थी।इस उत्खनन स्थान से लगभग तीन चार फ़ीट व्यास वाली एक काली छड़ मिली थी। इस सम्बन्ध में कोई जानकारी अभी तक नहीं हो सकी है कि वह काली छड़ किस पदार्थ की बनी थी।

पौराणिक कथा के आधार पर माना  जाता है कि खंडहर राजा बलि का निवास स्थान था। राजा बलि राजा प्रह्लाद के पौत्र एवं दैत्य राज हिरण्यकश्यप के प्रपौत्र थे। अभी भी बलिराजगढ़ की बहुमूल्य धरोहर धरती के नीचें ही दबी हुई है और सघन उत्खनन की अपेक्षा रखती है।

Author: Team MithilaConnect

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