मैथिली लोक-कथाओं में ये हैं कुछ लोकप्रिय क़िरदार !

लोक जीवन में ग्राम गौरव भी महत्वपूर्ण पक्ष होता है |  कई बार कहानियों में कोई गाँव अपने विद्द्वान और बुद्धिमान ग्रामीणों के लिए प्रसिद्ध होता है,तो कई बार किसी गाँव के लोगों से जुडी मुर्खता की कहानियां प्रसिद्ध हो जाती  हैं | कई बार तो यह प्रवृति इस हद तक पहुँच जाती है कि कुछ कुख्यात गाँवों में लोग विवाह तक नहीं करना चाहते | मिथिला की लोक कथाओं में ऐसे सन्दर्भ बहुतायत में मिलते हैं |

ब्राह्मण एवं नाई की भूमिका

Barber and Brahmin are popular charaters of the stories in Mithila

मिथिला की लोककथाओं में ब्राह्मण और नाई के किरदार बड़े महत्वपूर्ण हैं | इसका कारण जातीय नहीं है , अपितु, ग्राम-व्यवस्था में इनका महत्व है | जन्म से लेकर मृत्यु तक हर संस्कार में इन दोनों जातियों की सहभागिता अनिवार्य होती है , इनके बिना कोई संस्कार पूरा नहीं होता | इन दोनों का चातुर्य जो कभी कभी धूर्तता तक पहुँच जाता है , मैथिली लोककथाओं का महत्वपूर्ण वर्ण्य विषय है | नाई मिथिला में दूत और संदेशवाहक का भी काम करते हैं |कोई भी संस्कार हो , सबंधियों तक संबाद ले जाने का कार्य इन्हीं के द्वारा सम्पादित होता है |कई बार छोटे-छोटे राजाओं के राजकीय दूत का दायित्व भी ये निभाते हुए दिखते हैं | नाई गोनू झा से कई बार प्रतिस्प्रध्दा  करते हुए दिखते हैं और एकबार तो वे उन्हें पराजित करने में सफल हो जाते हैं |

ब्राह्मणों का रहन-सहन एवं पहनावा-ओढ़ावा

Sharp memory is associated with dhobi caste in mithila stories

मिथिला के ब्राह्मण अपने भोजनभट्ट स्वरूप के लिए भी विश्वविख्यात हैं यह अधिक खाने की प्रवृति  भी वहां के लोक कथाओं में खूब दिखती है | पाग (एक तरह की पगड़ी ) और  दोपटा धारण किये हुए मिथिला के पंडित उस प्रदेश की पहचान-चिन्ह जैसे हैं | वहां के खानपान में पान, मखान,माँछ  (मछली ),चुड़ा-दही आदि का बड़ा महत्व है और इससे जुडी लोककथाएँ भी मिलती हैं | मिथिला की लोककथाओं में ब्राह्मण- नाई को धूर्त ,तो ग्वालों को महामूर्ख रूपायित किया जाता है |

परन्तु कई बार ये ग्वाले विश्वसनीय मित्र के रूप में भी कहानियों में आते हैं | धोबी के स्मरण शक्ति से जुडी लोककथाएँ भी मिथिला में खूब प्रचलित हैं | रामायण की कथा में तो धोबी ने सीता के जीवन में लोकापवाद लाकर भूचाल ला दिया था , पर मिथिला की लोककथा में एक धोबिन ने सीता को राम की नजर में गिरने से बचा लिया | लोक तत्व की यही विशेषता भी है ,वह सामाजिक सामंजस्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहता है |

चुहरमल चोरों के देवता

मिथिला में चोरों का आतंक बहुत रहा है | मिथिला में इनकी उपस्थिति बड़ी संगठित रही है | संगठन इस हद तक की आज भी कई गाँव ऐसे हैं,जिसमे सिर्फ़ चोर रहते हैं या जिनका मुख्य पेशा चोरी है | इस गाँव के बाशिंदे अलग-अलग गाँव को अपनी चोरी के क्षेत्राधिकार में बाँट लेते हैं | चोरी के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण कोई चोर नहीं करता | विवाह में दहेज़ के रूप में चोर अपने दामाद को गाँवों के क्षेत्राधिकार ही देते हैं | मिथिला के लोक जीवन में ये ऐसे रच -बस गए हैं, मानो ये सामाजिक संरचना के स्वाभाविक अंग हों |ये चुहड़मल नामक लोकदेव की पूजा करते हैं और उनको सम्बद्ध चोरी आख्यान गर्व से सुनाते हैं | चोरों के आतंक को कम करने के लिए गोनू झा के द्वारा किये गए प्रयासों की मैथिली लोककथाएं विश्वप्रसिद्ध हैं |

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