क्यों है लोहना गाँव पौराणिक व ऐतिहासिक दृष्टी से महत्वपूर्ण

बिहार राज्य के मधुबनी जिलान्तर्गत लोहना एक ऐसा गाँव है जो दो नदियों कमला और लखनदई (लक्ष्मणा ) के किनारे बसा हुआ है | लोहना गाँव की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समीपस्त रेलवे स्टेशन का नाम भी लोहना रोड ही रखा गया | लोहना गाँव की उत्पति  का आधार स्कन्दपुराण में वर्णित ‘लोहिनी’ भगवती के द्वारा ‘लोहिकसुर’ नामक अत्याचारी दैत्य का वध माना जाता है | जनश्रुति और स्कंद्पुरण में उल्लेखित युद्ध वर्णन लोहना के इस प्राकृतिक भू-भाग को ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में बदल देते हैं |

लोहिनी के द्वारा लोहिकासुर -वध और ‘गंग’ कवि का लोहना वर्णन , लोहना की प्राकृतिक सुरम्यता इसके द्वारा भू-भाग में विशाल जंगल होने का संकेत देते हैं | जिसे धीरे धीरे साफ कर वसने योग्य बनाया गया  | इसी क्रम में सहरसा जिले के महिषी गाँव से सर्वतंत्र स्वतंत्र माँ तारा के अनन्य भक्त, तंत्र सिद्ध पंडित विश्वेश्वर झा का यहाँ आगमन सोलहवीं शताब्दी में हुआ था | उनकी ख्याति से प्रभावित होकर महातपस्वी लक्ष्मीनाथ गोसाईं भी उनसे मिलने लोहना आये थे |उन दोनों विभूतियों के आगमन से लोहना सिद्धिपीठ की तरह पवित्र हो गया |

कवि गंग ने तो इसकी खूबसूरती को निहारते हुए यहाँ तक  कहा है -

जम्बु अनार महाविकरार कि चम्पक बृक्ष शोभे अंगना

कौतुक हास विलासक कारण तै प्रभुवास लियो लोहना |

Lohna is a village in the madhubani district of Bihar in India

प्राचीन शिक्षा केंद्र के अवशेष

कवि गोविन्द दास ने , जो महाकवि विद्यापति  के समकालीन थे अपनी उत्कृष्ठ रचनाओं से सम्पूर्ण मैथिली वांगमय को सुरभित किया |उनका जन्म भी इसी पुण्य धरती पर हुआ था | आज भी लोहना में गोविन्द दास नाट्यकला परिषद जीवंत है |प्राचीनकाल में विक्रमशिला एवं नालंदा विश्वविद्यापीठ सदृश्य एक विश्वविद्यापीठ इस गाँव में भी स्थापित था |आधुनिककाल में भी काशी विद्यापीठ प्रभृति एक ऐसा विद्यापीठ है जो दूर दराज तक अपने गौरवशाली अतीत के लिए आज भी याद किया जाता है का अवशेष आज  भी यहाँ विद्यमान है | इस अवशेष का नाम है ‘महेश्वरी लता संस्कृत महाविद्यापीठ लोहना’| नव्य न्याय पढ़ने के लिए लोग यहाँ बंगाल एवं अन्य जगहों से आते थे | शिक्षा ग्रहण के क्रम में ही ‘नदियाशान्तिपुर’ से रघुनाथ शिरोमणि भी लोहना आये थे |

भुइयां पहलवान का अखाड़ा

A temple in Lohna village

शास्त्र चर्चा ,शास्त्र ज्ञान के अतिरिक्त यह धरती शस्त्र ज्ञान के साथ जीवन के लोक पक्ष के लिए भी याद की जायेगी जिसका ज्वलंत उदाहरण है - भुइयां पहलवान का अखाड़ा |कालान्तर में यह ‘भुइयांस्थान’बन गया जहां आज राधा कृष्ण का एक मंदिर है |यहाँ पुरातत्ववेत्ताओं के लिए प्रयाप्त संभावना है | इसके आस- पास पाए जाने वाले मिट्टी के घड़ों का अवशेष कुछ विशेष जान पड़ता है |इसकी मोटाई चौराई और मजबूती विशिष्ट है |गाँव के अग्नि कोण अर्थात पूर्ण दक्षिण कोण में एक विशाल प्राचीन शिव मंदिर है , जिसे बाबा विदेश्वर के नाम से जाना जाता है | इस इलाके में आस्था और विश्वास का यह एक ऐसा मंदिर है , जिस पर यहाँ के लोगों की अटूट श्रद्धा है और इसे ज्योर्तिंगलिंग के सामान ही स्थान दिया गया |

गौरवशाली अतीत

लोहना गाँव की प्राचीन गरिमा ,  उसकी दमकती सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित रही है | इस पवित्र धरती ने अनेकानेक कवि , विद्द्वान , दार्शनिक-चिन्तक , अध्यापक –प्राध्यापक , चिकित्सक-अभियंता  , वक्ता- अधिवक्ता सम्पादक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को जन्म देकर अपनी ऐतिहासिक महत्ता को बरकरार रखा है |महान दार्शनिक प्रभाकर ठाकुर इसी गाँव के थे जो शास्त्रार्थ में अपनी प्रखर ओजस्विता से अपने गुरु को प्रशन्न कर ‘रघुनाथ शिरोमणि’द्वारा महागुरु की उपाधि से सम्मानित हुए |कुल मिलाकर लोहना एक ऐसा ऐतिहासिक गाँव है जिसे मधुबनी जिले की हृदयस्थली कहा जा सकता है | प्राचीन अमरावती शहर का यह हिस्सा आज भी अपनी गौरवशाली अतीत के कारण इलाके में चर्चित गाँव के रूप में प्रतिष्ठापित है |

Mithilesh

Mithilesh

Mithilesh Jha works at MithilaConnect.Com.He keeps an eye on the latest news and happenings in the Mithila region.

Add comment


Security code
Refresh

Writers Requirement

Latest Articles

मॉडर्न-क्लासिक मैथिलि साहित्य की 5 बड़ी हस्तियाँ

mithilas_greatest_writers

सन १८३० के बाद का दौर मॉडर्न मैथिलि लिटरेचर की...

इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

Shivratri is associated with many stories of Lord Shiva

शिवरात्रि शिव को बहुत ही प्रिय है जिस कारण इसे...

क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

Kharmas is observed in Mithila twice a year

हिन्दू पंचांग एवं वैदिक ज्योतिष की गणना के...

Most Read Articles

क्यों प्रसिद्ध है कोइलख ग्राम मिथिला की काशी के रूप में !

Bhadrakali Kokilakshi Temple in Koilakh Village of Madhubani

मधुबनी जिलान्तर्गत कोइलख गॉव राजनगर प्रखंड में...

दरभंगा महाराज के पास था विश्वस्तरीय जवाहरातों का संग्रह!

King Rameshwar Singh of Darbhanga  had the unique Naulakha haar

दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह को अनमोल जवाहरातों...

कौन थे राजा सल्हेश ?

King Salhesh is regarded as a god by people in Mithila

राजा सल्हेश को  मधुबनी जनपदों में सर्वजातीय...