दरभंगा के 8 प्राचीन दर्शनीय स्थल

आलेख


1 अहिल्या स्थान

Ahilyasthan Kamtaul Darbhanga

अहिल्या स्थान में एक ऐतिहासिक प्रसिद्ध मंदिर है | यह जाले प्रखंड के कमतौल रेलवे स्टेशनसे लगभग तीन किलोमीटर दक्षिण में अवस्थित है | इसे लोग अहिल्या ग्राम के नाम से भी जानते हैं |

रामायण में अहिल्या अच्छी तरह से जानी जाती हैं | रामायण के अनुसार , जब भगवान राम अपने गुरु और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ मिथिला होते हुए जनकपुर जा रहे थे तो उनका पैर एक पत्थर से छू गया और वह पत्थर एक औरत बन गयी |वह औरत और कोई नहीं , अहिल्या थीं | वह पत्थर इसलिए बन गयी थीं कि वह अपने पति गौतम ऋषि के श्राप से अभिश्रापित थी |

जिस स्थान पर वे पत्थर से औरत बन गयीं वहां आज एक भव्य मंदिर है जिसे अहिल्या स्थान भी कहते हैं | यह स्थान अहियारी गाँव में स्थित है | अहिल्या स्थान में प्रति वर्ष दो बार वृहत मेला लगता है | एक , हिंदी महीने के चैत्र में राम नवमी के अवसर पर और दूसरा , अगहन महीने के विवाह पंचमी के अवसर पर | इस गाँव में अन्य मंदिर और मस्जिद भी हैं |

2 गौतम कुंड

Gautam Kund Darbhanga

गौतम कुंड कमतौल रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है और जोगियारा रेलवे स्टेशन से 19 किलोमीटर पूरब और दक्षिण कोण में पड़ता है | वैसे गौतम कुंड ब्रह्मपुर गाँव से पहले ही खिरोई नदी के पश्चिम भाग में अवस्थित है | यह स्थान गौतम कुंड और गौतम ऋषि के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है जो ब्रहमपुर गाँव के पास ही अवस्थित है |

पुराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान इन्द्र और चन्द्रमा के द्वारा गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या की शुद्धता उल्लंघन करने के बाद इस स्थान पर भगवान ब्रह्मा गौतम ऋषि से पहले ही दिखाई दिए थे | इस गाँव का नाम भी इसी घटना से जुड़ा हुआ है |

गौतम कुंड के सम्बन्ध में कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा स्वयं अपने तीक्ष्ण सात बाणों के द्वारा धरती को खोद कर यह कुंड बनाये ताकि गौतम ऋषि को दूर गंगा में स्नान करने नहीं जाना पड़े | अहिल्या स्थान और गौतम कुंड दोनों स्थान एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो जाले प्रखंड में अवस्थित है |जहाँ पर्यटक कमतौल रेलवे स्टेशन उतर कर आसानी से इन दोनों जगहों पर जा सकते हैं |

3 छ्परार

Chaprar Shiva Temple at Darbhanga

छ्परार गाँव बहादुरपुर प्रखंड में अवस्थित है , जो दरभंगा जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर है | इस गाँव में भगवान शिव का एक मंदिर कमला नदी के किनारे अवस्थित है जहाँ प्रति वर्ष कार्तिक और माघी पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है |

4 देकुलीधाम

Dekuli dham Temple

यह गाँव बिरौल प्रखंड में अवस्थित है | यह ग्राम भगवान शिव का एक बहुत विशाल मंदिर होने के कारण प्रसिद्ध है | भगवान शिव के भक्त प्रत्येक रविबार को यहाँ एकत्रित होते हैं | यहाँ प्रति वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर वृहत मेला लगता है |

5 कुशेश्वर-स्थान

kusheshwarsthan temple and bird century

यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है जो 16 किलोमीटर दूर पूरब में सिंघिया से और २२ किलोमीटर उत्तर पूरब में हसनपुर रोड रेलवे स्टेशन से दुरी पर स्थित है | हसनपुर रोड रेलवे स्टेशन समस्तीपुर-खगरिया रेल खंड के बीच उत्तर पूर्व रेलवे का एक स्टेशन है | भक्त यहाँ सालोभर भगवान शिव की पूजा करने के लिए आते हैं |

मंदिर में कई निशानों को देखने से स्पस्ट होता है कि इसका मूल महाकाव्य काल से है |कुशेश्वर स्थान प्रखंड में चालीस गांवों में जल जमाव है जो कुल क्षेत्रफल का ७०१९.७५ एकड़ जमीन में फैला हुआ है |

पारिस्थितिक , जीव ,पुष्प ,भौगोलिक और प्राकृतिक रूप में कुशेश्वर स्थान का बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है | वन्य जीव संरक्षण अधिनियम १९७२ के तहत कुशेश्वर स्थान को पक्षी अभ्यारण्य घोषित किया गया है |

6 बहेड़ा

Gangdev's fort ruins in Bahera at Darbhanga

बहेड़ा प्राचीन टीलों से भरा हुआ है | कहा जाता है की यहाँ कर्नाट वंश के राजा गंगदेव का किला था | यहाँ की खुदाई से प्राप्त बहुत ही प्राचीनकालीन रोचक तथ्य इतिहासकार डा० ब्रजकिशोर वर्मा द्वारा प्रकाश में लाया गया है |

7 देकुली

Deokuli Citadels near Laheria Sarai

कहा जाता है कि देकुली राजा देव सिम्हा का मुख्यालय था जो लहेरिया सराय के नजदीक है |

8 जरहत्तिया

14th century Yagna venue at Tarsarai near Darbhanga

यह तारसराय स्टेशन के नजदीक है | यहाँ एक प्रसिद्ध टैंक है जो १४वीं शताब्दी में हुए यज्ञ में बनाया गया था | यहाँ ओइनवारा वंश का राजा भैरवसिम्हा देव का राज था |

Author: Team MithilaConnect

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