श्मशान भूमि पर बना है मिथिला का यह मंदिर !

मिथिला में प्रति दिन लोग अपने -अपने घरों में भगवती की अलग-अलग रूपों में पूजा अर्चना करते हैं | लेकिन शारदीय नवरात्रा में वे विशेष रूप से माँ भगवती की पूजा करते हैं |इसलिए मिथिला की धरती को शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र माना गया है |बिहार के दरभंगा जिले में बहुत से मंदिरों में माँ भगवती की प्रतिमा स्थापितहैं जिसके पीछे बहुत सारे वास्तविक तथ्य छिपे हैं | उन्हीं मंदिरों में से एक है दरभंगा का रामेश्वरी श्यामा काली मंदिर |इस काली मंदिर का अपना अलग ही पहचान है | माँ श्यामा काली दरभंगा राज के श्मशान भूमि में स्थापित हैं |

चिता पर बना है यह मंदिर !

 Shyama temple premises in Darbhanga of Bihar

सन १९३३ ई० में महाराजा कामेश्वर सिंह ने अपने पिता महाराजा रामेश्वर सिंह की चिता पर श्यामा मंदिर की स्थापना की |महाराजा रामेश्वर सिंह माँ काली के बहुत बड़े भक्त थे| महाराजा रामेश्वर सिंह तंत्र विद्या के बहुत बड़े ज्ञाता थे| इसलिए उस समय इस मंदिर में माँ काली की पूजा तांत्रिक और वैदिक विधियों से की जाती थी |

ऐसी मान्यता है कि किसी का शुभ कार्य अर्थात मुंडन , उपनयन , शादी-विवाह होने के बाद  अगले एक साल तक  ना तो उसे किसी के दाह संस्कार में भाग लेना चाहिए और ना ही किसी के श्राद्ध का दानाखाना चाहिए | पर श्यामा मंदिर , जो कि एक श्मशान भूमि में बिराजमान हैं , में लोग शुभ कार्य जैसे मुंडन , उपनयन एवं मांगलिक कार्य भी करते हैं | यहाँ हजारों की संख्या में लोग प्रति दिन माँ श्यामा काली की दर्शन करने आते हैं |मंदिर में पूरे साल तक धार्मिक कार्यक्रम एवं अनुष्ठान होते रहते हैं जिसके कारण यह अध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण स्थान बन गया है |

सन १९८८ के बाद से बदला मंदिर परिसर का स्वरुप

Nabah Yagna was started in Shyama temple after the devastating earthquake of 1988

१९८८ ई० में मिथिला में भयंकर भूकंप आयी | भूकंप के भय से त्रस्त लोग श्यामा माई के शरण में आने लगे| वे भजन कीर्तन करने लगे इतना ही नहीं भूकंप से त्रस्त लोग प्रति वर्ष श्यामा माई नाम धुन का नवाह कर भूकंप एवं अन्य प्राकृतिक प्रकोपों से सुरक्षा के लिए मैया की गुहार करने लगे | उस समय से लेकर आज तक भजन कीर्तन एवं नवाह का आयोजन होता आ रहा है  और तब से यह नाम धुन संकीर्तन अब प्रति वर्ष होने लगा है |

मंदिर का सरकार द्वारा अधिग्रहण

In 2007 the goverment took over the control of Shyama temple administration

श्यामा मन्दिर की देख भाल दरभंगा राज परिवार के द्वारा ही किया जाता था |लेकिन भक्तों की बढ़ती भीड़ , सुरक्षा के दृष्टिकोण एवं विभिन्न प्रकार के आयोजनों को देखते हुए २००७ ई० से  इस मंदिर का अधिग्रहण कर लिया गया | इसके बाद माँ श्यामा न्यास समिति का गठन किया गया | अब इस न्यास समिति के द्वारा ही श्यामा नाम धुन संकीर्तन ,श्यामा सन्देश नामक पत्रिका का प्रकाशन , समय-समय पर अध्यात्मिक आयोजन एवं भागवत कथा का आयोजन होता है |

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