Raj Hospital Darbhanga

दरभंगा में एक अस्पताल जहाँ दूर देशो से इलाज के लिए आते थे लोग !

आलेख

ये अस्पताल है दरभंगा-राजकालीन , राज अस्पताल , जिसकी सन १८७८ ई०  स्थापना की गयी थी में जो उस वक्त  बंगाल राज्य के अंतर्गत था| कहते हैं कि दरभंगा राज अस्पताल सम्पूर्ण बंगाल में कलकत्ता के बाहर पहला ऐसा अस्पताल था जहाँ इलाज के लिए लोग अफगानिस्तान , नेपाल तथा बाकी अन्य देशों से आते थे | यहाँ लोगों के इलाज के लिए उच्च श्रेणी की उस वक्त की आधुनिक मशीनें थी | उस समय भी यहाँ लोगों की मुफ्त चिकित्सा की जाती थी| बर्तमान समय में इस अस्पताल का  पूरा नाम महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मेमोरियल स्पताल है और यह आयकर चौराहे के समीप स्थित है |

बिहार का सबसे पुराना अस्पताल

Raj Hospital Darbhanga

दरभंगा के महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने १८७८ ई० में इस अस्पताल की स्थापना की जिसका नाम उस समय “राज लेडी डेफरीन अस्पताल” रखा गया | दिलचस्प बात यह भी है की अंग्रेजी चिकित्सा के साथ साथ  अंग्रेजी शिक्षा को बढावा देने के उद्देश्य से दरभंगा का राज स्कूल भी उसी निर्णय के अंतर्गत खोलने का उपक्रम किया गया | संभवतः नि:शुल्क इलाज और दवाई देने की परिकल्पना भारत में इसी अस्प‍ताल से शुरु हुई। परन्तु दुर्भाग्य से  १९३४ ई० की भयानक भूकंप ने दरभंगा राज अस्पताल के भवन और उपकरणों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया | तत्कालीन महाराजा कामेश्वर सिंह ने क्षतिग्रस्त भवन की मरम्मत करवाने के बाद इसमें ऑपरेशन थियेटर स्थापित करवाया तथा नया नाम  लेडी बेल्डिंगटन हॉस्पीटल रखा | सन 40 के दशक में भारत में उपलब्ध में ऐसी कोई चिकित्सी्य मशीन नहीं था, जो यहां नहीं लगाई गयी थी | पर विडम्बना है , कि इस अस्पंताल की जिस दिन सबसे अधिक जरुरत महाराजा कामेश्वरर सिंह को हुई , उस दिन दुर्भाग्य से सब कुछ धरा का धरा रह गया और महारानी प्रिया का अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही निधन हो गया|

वर्त्तमान में स्थिति

१९६२ ई० में दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह की मृत्यु हो गयी | उनकी मृत्यु के बाद कुछ वर्षों के लिए इस अस्पताल को बंद कर दिया गया | लेकिन १९९३ ई० से इस अस्पताल को फिर से आम लोगों के लिए खोल दिया गया और अस्पताल की देख-रेख एक ट्रस्ट के द्वारा होने लगा | दरभंगा राज की वशीयतों में से एक तिहाई वशीयत आम लोगों की लिए दिया गया  | जिसमे से दरभंगा राज स्पताल भी एक था |

बर्तमान समय में अस्पताल एक अस्पताल अधीक्षक , पांच डॉक्टर और दस कर्मचारिओ के साथ दो शिफ्टों में चलता  हैं | अस्पताल जो एकसमय  १२ बीघा में फैला हुआ था  में अब कुल 12 कमरे हैं जिसमें से सिर्फ दो कमरों में ही कार्य होता है , शेष कमरों में से कुछ तो सरकार ने और बांकी कमरों को दबंगों ने अतिक्रमित कर लिया है | इस अस्पताल में २०० मरीजों की विस्तारों की व्यवस्था  थी लेकिन अब सब विस्तार गायब है |

खाली पड़े भूमि में भी लोगों ने आलिशान भवन बना लिया है | यहाँ तक कि कर्मचारियों को अस्पताल के तरफ से रहने के लिए मिले हुए आवास पर भी लोगों ने अपना कब्जा जमा लिया है | राज परिसर स्थित अस्पताल को अतिक्रमण कारियों से मुक्ति के लिए कई बार नेताओं ने बिधान सभा और बिधान परिषदों में भी आवाज उठाई | लेकिन परिणाम अबतक कुछ नहीं निकला है | मामला उच्च न्यायालय में वर्षों से लंबित है |

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