क्यों मनाया जाता है मिथिला में भातृ द्वितीया पर्व !

आलेख


भैया दूज कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के द्वितीया के दिन मनाया जाता है | अर्थात दीपावली के दो दिन बाद इस पर्व को मनाया जाता है | भैया दूज को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है जैसे – भातृ द्वितीया , यम दूज , भाई दूज | मिथिलांचल में इस पर्व को भर द्वितीया कहा जाता है |

कैसे मनाते हैं मिथिलावासी भातृ द्वितीया

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इस दिन पूरे मिथिलांचल में चहल -पहल रहती है | सुबह होते ही बहनें अपने भाइयों की मुंह मीठा करने के लिए बाजार से मिठाई मंगवाती हैं | अरवा चावल को पानी में भींगा कर पीठार (पीसा हुआ भीगा चावल )  बनाती हैं |

पीठार से आंगन में अरिपन देकर उस पर मिटटी या पीतल के वर्तन में पानी डाल कर उसमे पान के पांच पत्ते , मखान , सुपारी , कुम्हर (पेठा/कोहरा)  का फूल , चांदी का सिक्का एवं केराव का बजरी पानी में फुला हुआ डाला जाता है | अरिपन के बगल में पीढ़ी ( लकड़ी का बना हुआ बैठने के लिए } रखा जाता है उस पर भी पिठार लगाया जाता है |

भाई उस लकड़ी की पीढी पर पूरब मुख करके बैठते हैं एवं अपना दोनों हथेली को आगे बढ़ाते हैं | बहना अपने भाई को सबसे पहले माथे पर पिठार से तिलक लगाती हैं | फिर उस पर सिंदूर का टीका भी लगाती हैं |

इसके बाद खुले हुए दोनों हथेली में पिठार और सिंदूर लगा कर बर्तन में रखे हुए पान , सुपारी , मखान , कोहरा के फुल एवं बजरी रहती हैं फिर उस पर बाएं हाथ से जल गिराती हैं एवं दाहिने हाथ से भाई की हथेली में रखा हुआ सारी सामग्री उस मिटटी या ताम्बे के बर्तन में गिराती हुई नीचे लिखी हुई दोहा पढ़ती हैं –

गंगा नोतई  छथि यमुना के , हम नोतई ( भाई के नाम ) भाई के ,

जहिना जहिना गंगा-यमुना के धार बह्य हमर भाई सभक औरदा बढ़ेय |

यह प्रक्रिया तीन बार की जाती है | फिर इसके बाद बहना मिटटी के बर्तन में से एक अंकुरी निकाल कर भाई के मूंह में खिलाती है | उसके बाद मिठाई खिलाती हैं |

फिर इसके बाद दूसरे भाई एवं बहनों का न्योता लेने की प्रक्रिया जारी रहती है | इसके बाद भाई अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार भी देते हैं |

भाई को बहने कराती हैं  मिथिला के परम्परागत  भोजन

Traditional food of Mithila

इस सबके बाद भाई को भोजन कराने की प्रक्रिया शुरू होती है | भाई को बहना मिथिला के परम्परागत भोजन कराती हैं | अर्थात पका हुआ अरवा चावल (भात) , अरहर की दाल , आलू , केला , बैगन , परवल का तरुआ (तले हुए परवल) , चार-पांच प्रकार की सब्जी , पापड़ , अचार जिसमे मिथिला का प्रसिद्द तिलकोर का रहना अनिवार्य है | अंत में दही एवं मिठाई भाई को खाने में परोसा जाता है |

भातृ द्वितीया आखिर क्यों मनातें हैं !

Why Bhratri Dwitiya is Celebrated ?

बहन यदि ससुराल में है तो भाई उसके ससुराल जाकर बहन से न्योता लेता है | बहन भाइयों की राह देखती रहती हैं |इस पर्व के दिन बहने अपने भाइयों की लम्बी उम्र के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं |

धर्म शास्त्र के अनुसार इसी दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को घर बुला कर उनका आदर सत्कार किया था | इससे प्रभावित होकर यमराज ने यमुना को उम्र भर सधवा  रहने का आशीर्वाद दिया था | इसी कथा से प्रेरित होकर बहने अपनी भाइयों से नोत (न्योता) लेती हैं |

Author: Team MithilaConnect

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