बिहार का एक पुस्तकालय जहाँ है दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह

आलेख


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पटना के अशोक राजपथ पर गंगा नदी के किनारे स्थित खुदाबक्श पुस्तकालय अपने २१००० प्राचीन पांडुलिपियों और करीब २.५ लाख प्रकाशित पुस्तकों के संग्रह के कारण कई मायनों में वाकई अनोखा है |यह भारत  राष्ट्रीय पुस्तकालयों में से एक है जिसे पहले खुदाबख्स मशरिकी किताब खाना के नाम से जाना जाता था| कभी निजी रहा यह पुस्तकालय अक्तूबर, १८९१ से जनता के लिए तत्कालीन बंगाल के गवर्नर सर चार्ल्स के द्वारा खोल दिया गया |

बहादुर खुदा बख्स थे संस्थापक

इस पुस्तकालय  के संस्थापक छपरा निवासी खान बहादुर खुदा बख्स थे |पुस्तकों में विशेष रूचि रखने वाले खुदा बक्श ने शुरुआत अपने द्वारा संकलित किये गए करीब १४०० पांडुलिपियों और दुर्लभ पुस्तकों से इस पुस्तकालय की नीव रखी थी |खुदा बख्स खान  ने 1876 में अपनी मृत्यु के उपरांत अपना सारा  व्यक्तिगत संग्रह और ट्रस्ट का दस्तवेज भी इस पुस्तकालय को बिहार वासियों के लिए दे दिया | खान बहादुर खुदा बख्स   ने अपने पिता से , जो स्वयं पुस्तकों के प्रेमी थे , इस पुस्तकालय के निर्माण की प्रेरणा प्राप्त की|

भारत सरकार द्वारा संचालित

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यह पुस्तकालय अब एक स्वायत्त संगठन है जो भारत सरकार इए अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय के द्वारा संचालित होता है | बिहार में यह एक बोर्ड के द्वारा संचालित होता है | बोर्ड के चेयरमैन राज्यपाल होते हैं |इस पुस्तकालय में पारसी और अरबी भाषा में पांडुलिपियों का दुर्लभ संग्रह है |इस पुस्तकालय में अद्भुत और दुर्लभ राजपूत और मुगलकालीन पेंटिंग्स भी उपलब्ध हैं |१९६९ ई० में भारत के संसद ने एक कानून खुदा बख्स ओरियंटल सार्ब्जनिक पुस्तकालय अधिनियम १९६९ बना कर इसका नाम खुदा बख्स ओरियंटल  सार्ब्जनिक पुस्तकालय रख दिया |

दुर्लभ पुस्तके है इस पुस्तकालय में !

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आज यह पुस्तकालय विश्वभर के विद्वानों को आकर्षित करता है | इस पुस्तकालय में उर्दू , संस्कृत और पाली भाषा की साहित्य एवं  २१, ००० से उपर पांडुलिपियाँ , पांच सौ वर्ष पुराना उपनिषद , नेपोलियन बोनापार्ट की डायरी और लार्ड बायरन की ओडे टू नेपोलियन और पवित्र पुस्तक कुरान की सम्पूर्ण पुस्तक है | दुर्लभ पाण्डुलिपियों जैसे ‘तारीख-इ-खानदान -इ तिमुरिया और अकबर के शासनकाल में लिखी गयी पुस्तक जैसे सूरत-इ-फिरोज-साही , दीवान ऑफ हाफिज ऑफ़ शिराज , शहनशा नामा ,पादशाह नानिः , किताब अल हशीश , मुरक्का अल- मीलुक , उर्दू में पिक्टोरियल अलबम और किताब-अल-तसरीफ आदि पुस्तकालय में उपलब्ध है |

वर्तमान में इस पुस्तकालय के निदेशक डा० इम्तियाज अहमद हैं जो वर्ष २००४ से अपने पद पर कार्यरत्त हैं | दुर्लभ पांडुलिपियों में एक है तारीख़ –इ- खानदान –इ-तिमुरिया जो अकबर महान के शासन काल में लिखा गया था | इसी पुस्तकालय में उपलब्ध है | इसके अलावा सुरत –ए –फिरोज-साही , दीवान ऑफ़ हाफीज ऑफ़ शिराज , शहनशा नामा ,पादशाह नानिः , किताब अल हशैश , मुरक्कुआ अल-मीलुक ,उर्दू में पिक्टोरियल अलबम और किताब –अल -तसरीफ मुख्य दुर्लभ पुस्तक इस पुस्तकालय में उपलब्ध है |

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