क्यों मिथिलाचल की मशहूर लहठी इतिहास के पन्नो में हो जाएगी दफ़न ?

सम्पूर्ण मिथिलांचल में लहठी शुभ कार्यों में पहना जाता है | शादी-विवाह के मौकों से लेकर मिथिला के हर छोटे बड़े त्योहार आदि में लाह की बनी लहठी को पहनना बहुत ही शुभ माना जाता है| मिथिलांचल में नवविवाहिता शादी के बाद कम से कम एक वर्ष तक कांच की चूड़ियों की जगह लाह की […]

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भरवारा ग्राम निवासी गोनू झा थे बीरबल सरीखे मशहूर !

गोनू झा को सम्पूर्ण मिथिलांचल में बीरबल के नाम से पहचाना जाता है | जिस प्रकार बीरबल और तेनाली राम अपनी चतुराई और हाजिर जबाबी के लिए प्रसिद्ध हैं उसी तरह गोनू झा भी अपनी चतुराई और वाक्पटुता के लिए समपर्ण मिथिलांचल में प्रसिद्ध हैं | गोनू झा का जन्म १३ वीं  शताब्दी में दरभंगा […]

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क्या कहा था भगवान् राम ने सिमरिया धाम के सन्दर्भ में !

सिमरिया धाम को हम कल्पवास मेले के रूप में जानते हैं | इस स्थान के सबसे नजदीक बड़ा स्टेशन बरौनी और बेगुसराय है जहां पर सभी रूटों की मेल एवं एक्सप्रेस गाड़ियां रुकती है | यहाँ से आप टैम्पो , बस एवं अन्य सवारियों से सिमरियाघाट पहुँच सकते हैं | वैसे सिमरिया घाट के पास […]

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कुप्रथा पर हास्यलेख द्वारा चोट करते थे डा. हरिमोहन झा

हरिमोहन झा को मैथिलि सहिया जगत में ‘ हास्य और व्यंग के सम्राट ‘ के रूप में जाना जाता है | उनके मशहुर पात्र ‘खट्टर काका’ ने उन्हें बेहद प्रसिद्धि दिलाई थी | मैथिली साहित्य के इस  विशिष्ट , आधुनिक एवं प्रसिद्ध लेखक थे  ने अपनी कृतियों द्वारा मिथिलांचल समाज में व्याप्त अंधविश्वास , रुढ़िबाद […]

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क्या विलुप्त हो जायेगा मिथिला में जुड़शीतल पर्व ?

मिथिला में जुड़शीतल पर्व बैशाख की पहली तिथि को मनाया जाता है। इसे बासी पर्व भी कहा जाता है। वैसे तो सम्पूर्ण भारत वर्ष में पर्व त्यौहार मनाये जाते हैं | लेकिन मिथिला में मनाये जाने वाले जितने भी पर्व त्यौहार हैं उसमे जुड़शीतल पर्व की बात ही कुछ और है | जुड़शीतल से जुडी […]

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शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करने वाले मण्डन मिश्र कौन थे !

मण्डन मिश्र  को इतिहास  एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जानता हैं जिन्होंने ने शंकराचार्य  को शास्त्रार्थ में तगड़ी टक्कर दी थी | उनकी पत्नी भारती ने तो शंकराचार्य  शास्त्रार्थ में को हरा भी दिया था | मण्डन मिश्र  का इतिहास मण्डन मिश्र गृहस्थ आश्रम का पालन करने वाले मिथिला के प्रकाण्ड विद्वान थे | […]

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एक कहानी दरभंगा के दुल्हिनियाँ पोखर की !

दरभंगा राज की जितने भी तालाब हैं उसमे से लक्ष्मीसागर साधुगाछी स्थित एक ऐतिहासिक तालाब है , जिसे स्थानीय लोग दुल्हिनियाँ पोखर के नाम से जानते हैं | दरभंगा महाराज सर रामेश्वर सिंह ने इस तालाब की खुदाई करवाई थी | लोगों का कहना है कि उस समय महाराजा के परिवार से रिश्ता बनाने के […]

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‘गंगा नदी से भी ज्यादा पवित्र ‘ गया के फल्गु नदी पर छाया अस्तित्व का संकट

गया शहर के पूर्वी छोर पर पवित्र फल्गु नदी बहती है. तकरीबन पूरे साल ही लोग अपने पूर्वजों के लिए मोक्ष की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं और फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करते हैं. पितृपक्ष के दौरान यहाँ मेला लगा रहता है |हिंदू धर्म में सनातन काल से ‘श्राद्ध’ की परंपरा […]

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Jaale Ratneshwari Temple Darbhanga

मिथिला में यह देवी आज भी करती है राजा के छुपे हुए खजाने की रक्षा !

१२३४ ई० से लेकर १२९३ई० तक बंगाल में सेन राजवंश का शासन था | किन्तु जब वहां देवा राजवंश की स्थापना हुई तो सेन राज वंश  के वारिश वहां से पलायन कर मिथिला आ गए | कैसे आया खज़ाना ! सेन वंश के एक शासक रत्नसेन के नामपर ही इस गाँव का नाम रत्नपुर पड़ा […]

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Ucchaith Temple Madhubani

मधुबनी में है मिथिला का प्रसिद्द प्रबल-सिद्धपीठ भगवती स्थान उचैठ

भगवती स्थान उचैठ  मधुबनी जिला के बेनीपट्टी अनुमंडल से मात्र ४ किलोमीटर की दुरी पर पश्चिम दिशा की ओर स्थित है|  यह स्थान मिथिला में एक प्रसिद्द  सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है | भगवती मन्दिर के गर्भगृह में माँ दुर्गा सिंह पर कमल के आसन पर विराजमान हैं | दुर्गा माँ सिर्फ कंधे […]

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