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राज दरभंगा के अस्तित्व से अन्त तक का एक लेखा जोखा !

जब दिल्ली की गद्दी पर अकबर बैठा तो उसे मालुम हुआ कि मिथिला में फैली आराजकता के कारण कर  की प्राप्ति नहीं हो पा रही है तो सबसे पहले उसने मिथिला में शान्ति स्थापना का प्रयास किया उसने यह भी निर्णय लिया कि किसी मैथिल ब्राम्हण को वहां का शासक बना दिया जाय जो वहां […]

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मैथिली फ़िल्में जिन्होंने जगाया था ‘स्पार्क’

मैथिली  भाषा के विकास में मैथिली फिल्मों का  बहुत बड़ा योगदान रहा है |ये फिल्में मैथिल समाज में फैली हुई परम्परागत रुढ़िवादी रीति-रिवाज को दूर करने में सहायक तो साबित हुयी हैं ही साथ ही मिथिला-मैथिली के प्रति प्रेम भाव जगाने में भी पीछे नहीं रही हैं | वैसे तो मैथिली भाषा में बहुत सारी […]

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Ahilyasthan Mela

मिथिला समेत बिहार के छह बड़े और प्राचीन मेले

सर्दियों की आहट के साथ ही मिथिला समेत बिहार के अन्य भागों में मेले शुरू हो जातें हैं | इन मेलों की शुरुआत आज से सैकड़ो साल पहले हुयी थी और आज तक यह लोगो में उत्सुकता बनाये रखने में कामयाब हैं |  तो चलिए बात करतें है कुछ प्राचीन और बड़े मेले की | […]

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The 300 years of Temple of Mithila called 'BhootNath' Temple of Lord Shiva

शमशान घाट के बीच ३०० वर्ष पुराना मिथिला का एक मंदिर

मिथिला में अनेक मंदिर है और कुछ तो सैकड़ो वर्ष पुराने हैं |  इन्ही मंदिरों में से एक मंदिर है जिसे भुत नाथ का मन्दिर जो की बेनीपुर अनुमंडल से करीब ५ किलोमीटर दूर है | ख़ास बात यह है की यह मंदिर कमला नदी के किनारे स्थित है | मंदिर की एक और एक […]

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‘मामा यौ कनी खैनी दिय’ ने बनाया था इस गायक को कालजयी !

नयी पीढ़ी के युवा भले ही हेमकान्त को नहीं जानतें हो पर उनके गाये हुए गीतों को कभी ना कभी अवश्य ही सुना होगा | मैथिलि भाषा में उनका गाना ‘मामा यौ कनी खैनी दिया’ अस्सी के दशक में अत्यंत ही प्रचलित हुआ था | प्रसिद्द मैथिलि गायक हेमकान्त झा वैसे अब हमारे बीच नहीं […]

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ASI had acknowledged the importance of this fort in Darbhanga while comparing it with Red fort of Delhi

क्यों दरभंगा महाराज ने बनवाया था दरभंगा में दूसरा लाल किला !

दरभंगा बस स्टैंड के समीप स्थित दरभंगा राज का किला , सामने वाली सड़क से गुजरने वालों का ध्यान बरबस ही खीच लेता हैं | दरभंगा के महाराज का यह किला उत्तर बिहार के दुर्लभ और आकर्षक इमारतों में से एक है | भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने १९७७-७८ में इस किले का सर्वेक्षण […]

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क्यों मनाया जाता है मिथिला में भातृ द्वितीया पर्व !

भैया दूज कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के द्वितीया के दिन मनाया जाता है | अर्थात दीपावली के दो दिन बाद इस पर्व को मनाया जाता है | भैया दूज को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है जैसे – भातृ द्वितीया , यम दूज , भाई दूज | मिथिलांचल में इस पर्व को भर […]

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Dhanteras What to Shop and What Not !

धनतेरस पर नहीं खरीदें एल्युम‌िन‌ियम और शीशे की वस्तु !

ऐसी मान्यता है की , कार्तिक महीना के कृष्णपक्ष तृतीया के दिन , आयुर्वेद के जनक भगवान  धनवन्तरी ने हाथ में कलश सशरीर जन्म लिया था | कहा जाता है कि वास्तव में यह  भगवान् बिष्णु ही थे जिन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की प्रचार प्रसार  के लिए कार्तिक महीना के कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी के […]

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A potter artisan in Darbhanga giving final touches to the idols of Lakshmi Ganesh before Diwali

दीपावली – कैसे होती है मिथिला में देवी लक्ष्मी की पूजा !

दीपावली मिथिला सहित भारत के मुख्य त्योहारों में से एक प्रसिद्ध त्यौहार है | इस पर्व को देश -विदेश में हिन्दू धर्म के मानने वाले लोग धूम धाम से मनाते हैं | यह वास्तव में एक प्रकाश का पर्व है | यह पर्व अन्धकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है | मन में अन्धकार  […]

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Cultural relations between mithila and braj

मिथिला वासी और ब्रजवासी के पारस्परिक संबंधों की पुनर्स्थापना

मुग़ल शासक औरंगजेब ने मिथिला सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष पर अपने शासन काल में अत्याचार किया और उसके अत्याचार एवं असहिष्णुता के कारण बहुतों मिथिलावासी मिथिला से पलायन कर अन्य प्रदेशों में जा कर बस गए | ब्रज प्रदेश में रहने वाले प्रवासी मैथिलों का एवं मिथिला वासी मैथिलों का आवागमन भी बंद हो गया […]

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