लाचार मजिस्ट्रेट

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एक मजिस्ट्रेट साहब को बचपन से ही इस बात से चिढ़ थी

कि स्कूल में मास्टर लोग एक गलती पर कई-कई बार क्यों लिखवाते हैं।

लेकिन बेचारे तब बच्चे थे, लाचार थे, इसलिए कुछ नहीं कर सकते थे।

मजिस्ट्रेट बनने के बाद एक बार उनके सामने एक केस आया।

बिना लाइट के साइकिल चलाने के अपराध में एक मास्टर साहब पकड़े गए।

मजिस्ट्रेट साहब ने पूरा किस्सा सुना और दंड सुना दिया-‘

‘दो सौ बार आप यहाँ बैठकर यह लिखकर दीजिए कि आगे से बिना लाइट के साइकिल नहीं चलाऊँगा।‘

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