कालेज जो आज भी है मिथिला का गौरव !

‘सर ,  हमारा कॉलेज राष्ट्रविरोधी नारे नहीं लगाता ’,  कहते हुए यह छात्र अपनी कक्षा की ओर बढ़ जाता है |  अब आप इसे गर्व कह लीजिये या कुछ और , किन्तु , शिक्षा जगत में सी एम कालेज का स्थान आज भी दरभंगा  ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मिथिलांचल में एक विशिष्ट स्थान रखता है  | एल . एन . मिथिला विश्वविद्यालय के अंतर्गत जितने  भी शिक्षण संस्थान हैं उन सभी शिक्षण संस्थानों में से सी एम कालेज  अर्थात ‘  चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय ’ का स्थान प्रथम है |

कैसे बना सी एम् कालेज

CM Science College Darbhanga

सन १९३८ ई०  दरभंगा के विशिष्ट एवं विख्यात हस्तियों द्वारा मिथिलांचल के सुदूर गाँवों की प्रतिभाओं को पश्चिमी मॉडल पर आधारित उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए एक शिक्षण संस्थान के अवधारणा के आधार पर स्थापना की गयी |

सर्वप्रथम इस महाविद्यालय की स्थापना लहेरियासराय में एक निजी भवन में हुई  और महाविद्यालय का नाम रखा गया “मिथिला महाविद्यालय” |  आज भी मिथिला के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इसे ‘मिथिला महाविद्यालय’ के नाम से ही जानते हैं |

बाद में मिथिला महाविद्यालय को दरभंगा टावर के पास ओवल मार्केट में स्थानान्तरित किया गया | इस महाविद्यालय की स्थापना में पंडित गंगाधर मिश्र जो कि स्थानीय व्यवहार न्यायालय में एक सीनियर वकील एवं सौराष्ट्र के निवासी थे के अथक प्रयास एवं उनके योगदान को भुलाया  नहीं जा सकता |

उनके योगदान एवं सराहनीय प्रयास को देखते हुए महाविद्यालय परिसर का “ नाम गंगाधर निकेतन ” रखा गया है जिसमें आज चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय स्थित है |

मिथिला महाविद्यालय से कैसे हुआ चंद्रधारी महाविद्यालय

Chandradhari Singh gave the financial assistance in setting up of the college

बाद में रांटी डेओढी के चंद्रधारी बाबू ने महाविद्यालय को वित्तीय सहायता प्रदान की इसलिए महाविद्यालय में उनका भी नाम जोड़ा गया | महाविद्यालय के स्वरूप को आगे विकसित करने में बिहार के तत्कालीन एवं प्रथम मुख्य मंत्री स्व० डा० एस० के० सिन्हा एवं दरभंगा के दो विशिष्ट नागरिकों ने ठोस प्रयास किया |

ये थे ,  दरभंगा नगरपालिका के उपाध्यक्ष स्व० कुंवरकल्याण लाल एवं स्व० सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा | इन लोगों के अथक प्रयास के कारण ही महाविद्यालय का कार्य और विस्तार कानूनी भार के बिना होता रहा |

बहुत जल्द ही १९५० के शुरुआत में महाविद्यालय के द्वारा चार  संकायों में डिग्री की शिक्षा प्रदान की जाने लगी | ये चार संकाय थे – आर्ट्स , साइंस , कॉमर्स और विधि |

बिहार विश्वविद्यालय से सम्बंधता

१९५२ ई० में इस महाविद्यालय को पटना विश्वविद्यालय से हटाकर विहार विश्वविद्यालय जिसकी स्थापना हाल के दिनों में ही हुई थी से सम्बद्ध किया गया  |

महाविद्यालय के प्रथम स्थायी प्राचार्य , डा० बी०एम०के० सिन्हा , जो कि अंग्रेजी के प्रोफेसर थे को बिहार विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बना दिया गया |

डा० एल०के० मिश्रा ने दिलाई प्रसिद्धि

Since its formation CM Science College of Darbhanga has remained to be a premier institution

महाविद्यालय अब नए प्राचार्य डा० एल०के० मिश्रा के नेतृत्व में नई उंचाई पर पहुँच गया | डा० एल ० के० मिश्रा इस महाविद्यालय में १९४० के शुरुआत में रसायन शास्त्र के लेक्चरर रह चुके थे | उनके नेतृत्व में महाविद्यालय सम्पूर्ण मिथिलांचल में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका था |

१९६२ ई० में आर्ट्स और कॉमर्स के कुछ चुनिन्दा विषयों में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्रदान की जाने लगी |इसी वर्ष महाविद्यालय बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर की एक अंगीभूत इकाई बन गया  | जिसकी पुष्टि ३० मार्च १९६२ को बिहार विश्वविद्द्यालय अधिनियम १९५२ अनुसूची ४ (१३) के अंतर्गत की गयी |

तत्कालीन महाविद्यालय शासी निकाय के सचिव पं० राधा नंदन झा थे | इन्होने उस ऐतिहासिक कागजात पर हस्ताक्षर कर दिया |

पालीराम गार्डेन है आज का स्थल

अप्रैल १९६५ में तत्कालीन बिहार के मुख्य मंत्री पं० विनोदानंद झा ने महाविद्यालय के बड़े भवन की  आधारशिला रखा | भूमि के जिस टुकड़े पर आधारशिला रखा गया वह पालीराम गार्डेन के नाम से जाना जाता है | जहां पर आज महाविद्यालय का वर्तमान परिसर स्थित है |

चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय का विभाजन और यूनिवर्सिटी का बनना

इसके बाद तो महाविद्यालय प्रगति के पथ पर लगातार तीव्र गति से बढ़ता रहा | महाविद्यालय पांच अगस्त १९७२ को आर्ट्स , कॉमर्स एवं विज्ञान संकाय का स्नातकोत्तर शिक्षा केंद्र बन गया |

मिथिलांचल के लोग लम्बे समय से दरभंगा में एक विश्वविद्यालय की मांग कर रहे थे | मिथिलांचल के लोगों के मांग के अनुरूप दरभंगा में मिथिला विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी |साथ ही चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय को दो महाविद्यालयों में विभाजित कर दोनों महाविद्यालयों को मिथिला विश्वविद्यालय का प्रथम अंगीभूत महाविद्यालय बना दिया गया |

दोनों में से एक चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय हो गया जिसमे कला और वाणिज्य की पढ़ाई होती है और दुसरा चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय हो गया |

चंद्रधारी मिथिला कला महाविद्यालय

CM Arts College

चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालय का भवन किलाघाट में बागमती नदी के किनारे स्थित है | महाविद्यालय परिसर दो भागों में बिभक्त है | नदी के पूर्वी भाग में महाविद्यालय की मुख्य भवन के साथ विभाग , छात्र एवं छात्राओं के लिए कॉमन रूम , एन सी सी एवं एन एस एस , पुस्तकालय ,बी सी ए केंद्र , ईग्नू कार्यालय , प्राचार्य की चेम्बर , प्रशासकीय ब्लाक , पी एन बी ब्रांच , डाक घर और स्वीमिंग पुल स्थित है |

नदी के पश्चिमी भाग में महाविद्यालय की छात्रावास , प्राचार्य आवास , शिक्षक आवास , महिला छात्रावास (निर्माणाधीन ) और खेल मैदान स्थित है | नदी के दोनों ओर का परिसर पुल से जुद्दा हुआ है | यह पुल महाविद्यालय परिसर के उत्तर में स्थित है | महाविद्यालय में आर्ट्स और बाणिज्य संकाय में इंटर से लेकर पीजी तक की पढाई होती है | सभी विभागों अपना-अपना स्टाफ रुम हैं |

विशाल पुस्तकालय में है एक लाख से ज्यादा पुस्तकें

महाविद्यालय में एक ऑडीटोरियम सह परीक्षा भवन भी है जो स्व० कर्पूरी ठाकुर और स्व० ललित नारायण मिश्र की याद में बनाए गए हैं | इस सभागार में लगभग २५०० आदमियों की बैठने की क्षमता है | महाविद्यालय में एक विशाल पुस्तकालय भी है , जिसमे एक लाख से ज्यादा पुस्तक उपलब्ध है |

चंद्रधारी महाविद्यालय आज की स्थिति

CM Science College of Today 

चंद्रधारी महाविद्यालय अपने ३७ वर्ष की उम्र में प्रवेश कर चुका है | इसे नेक (NAAK) के द्वारा बी++ की मान्यता प्राप्त है | महाविद्यालय में ST/SC छात्रों और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए यु जी सी के द्वारा निर्धारित विशेष कोचिंग के व्यवस्था प्रदान की जाती है |

इग्नू की अध्ययन केंद्र यहा १९९७ से कार्यरत है जिसमे १५०० छात्र विभिन्न कोर्सों में अध्ययन कर रहे हैं | बी सी ए का अध्ययन केंद्र यहाँ सत्र १९९९-२००० से ही कार्यरत है |

महाविद्यालय में और कई तरह के कोर्स संचालित किये जा रहे हैं जैसे- पुस्तकालय एवं सुचना विज्ञान , पत्रकारिता , ई-बाणिज्य , अंतर्राष्ट्रीयव्यापार , आतिथ्य सत्कार , खानपान , लेखन-अनुबाद कोर्स | हाल में महाविद्यालय में एक अम्बेदकर अध्ययन केंद्र स्थापित की गयी है |

Team MithilaConnect

Team MithilaConnect Google Plus

Team Mithilaconnect Local tries hard to get you aware of news , events and information's of Mithila region.Bless US !

Latest News

PG and B.Ed registration date extended in LNMU

PG and B.Ed registration date extended in LNMU

LNMU has released the date for registration of...Read more...

Part 1 Special practical and Viva Exams on March 20-21

Special practical and Oral examination of ...Read more...

Read Articles

मॉडर्न-क्लासिक मैथिलि साहित्य की 5 बड़ी हस्तियाँ

mithilas_greatest_writers

सन १८३० के बाद का दौर मॉडर्न मैथिलि लिटरेचर की...Read more...

इसलिए इतनी महवपूर्ण हैं अभीष्टफल दायिनी महाशिवरात्रि

Shivratri is associated with many stories of Lord Shiva

शिवरात्रि शिव को बहुत ही प्रिय है जिस कारण इसे...Read more...

क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

Kharmas is observed in Mithila twice a year

हिन्दू पंचांग एवं वैदिक ज्योतिष की गणना के...Read more...

Read Hindi Jokes

जापानी यात्री

japanese_passenger_hindi_jo

एक बार ट्रेन में कुछ यात्री बैठे थे , तो उनमें...Read more...

हमारी मशहूर गोंद

salesman hindi joke

श्रीमतीजी को उस चमक-दमक वाली दूकान के फर्श पर...Read more...

सिगरेट पीनी है?

petrol pump hindi joke

एक पेट्रोल पम्प के सूचना बोर्ड पर लिखा था-...Read more...