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मॉडर्न-क्लासिक मैथिलि साहित्य की 5 बड़ी हस्तियाँ

सन १८३० के बाद का दौर मॉडर्न मैथिलि लिटरेचर की शुरुआत मानी जा सकती है | इस अंतराल में मैथिलि साहित्य जगत में अनेको मैथिलि साहित्य रत्न पैदा हुए जिनमे बिनोद बिहारी वर्मा , सुरेन्द्र झा सुमन आदि थे | आईये जानते हैं कुछ बेहद चर्चित क्लासिक और मॉडर्न डे मैथिलि साहित्यकारों के बारे में […]

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Kharmas is observed in Mithila twice a year

क्यों वर्जित होतें हैं शुभ कार्य खरमास काल में

हिन्दू पंचांग एवं वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार एक ही राशि में एक महीना तक सूर्य का रहना अर्थात जब सूर्य के १२ राशियों का भ्रमण करते हुए वृहस्पति , धनु और मीन राशियों में पहुँचते हैं तो इस दिन से अगले ३० दिनों की समय को खरमास कहा जाता है | ख़ास कर […]

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Gargi was a famous Indian women philospher who was from Mithila

मिथिला की पांच विख्यात महिलाये जिनका पुस्तकों में होता हैं उल्लेख

मिथिला की कुछ स्त्रियों का प्राचीन ग्रंथों और इतिहास की पुस्तकों में अक्सर नाम उल्लेखित रहता है | इन स्त्रियों ने  अपने ज्ञान से न केवल मिथिला अपितु संपूर्ण भारतवर्ष का नाम इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया है | आईये जानतें हैं की ये  कौन थीं ? 1 गार्गी वाचकनवी महर्षि वचक्नु  की […]

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CM Science College Darbhanga

कालेज जो आज भी है मिथिला का गौरव !

‘सर ,  हमारा कॉलेज राष्ट्रविरोधी नारे नहीं लगाता ’,  कहते हुए यह छात्र अपनी कक्षा की ओर बढ़ जाता है |  अब आप इसे गर्व कह लीजिये या कुछ और , किन्तु , शिक्षा जगत में सी एम कालेज का स्थान आज भी दरभंगा  ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मिथिलांचल में एक विशिष्ट स्थान रखता है  […]

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raj_darbhanga_history

राज दरभंगा के अस्तित्व से अन्त तक का एक लेखा जोखा !

जब दिल्ली की गद्दी पर अकबर बैठा तो उसे मालुम हुआ कि मिथिला में फैली आराजकता के कारण कर  की प्राप्ति नहीं हो पा रही है तो सबसे पहले उसने मिथिला में शान्ति स्थापना का प्रयास किया उसने यह भी निर्णय लिया कि किसी मैथिल ब्राम्हण को वहां का शासक बना दिया जाय जो वहां […]

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Ahilyasthan Mela

मिथिला समेत बिहार के छह बड़े और प्राचीन मेले

सर्दियों की आहट के साथ ही मिथिला समेत बिहार के अन्य भागों में मेले शुरू हो जातें हैं | इन मेलों की शुरुआत आज से सैकड़ो साल पहले हुयी थी और आज तक यह लोगो में उत्सुकता बनाये रखने में कामयाब हैं |  तो चलिए बात करतें है कुछ प्राचीन और बड़े मेले की | […]

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The 300 years of Temple of Mithila called 'BhootNath' Temple of Lord Shiva

शमशान घाट के बीच ३०० वर्ष पुराना मिथिला का एक मंदिर

मिथिला में अनेक मंदिर है और कुछ तो सैकड़ो वर्ष पुराने हैं |  इन्ही मंदिरों में से एक मंदिर है जिसे भुत नाथ का मन्दिर जो की बेनीपुर अनुमंडल से करीब ५ किलोमीटर दूर है | ख़ास बात यह है की यह मंदिर कमला नदी के किनारे स्थित है | मंदिर की एक और एक […]

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ASI had acknowledged the importance of this fort in Darbhanga while comparing it with Red fort of Delhi

क्यों दरभंगा महाराज ने बनवाया था दरभंगा में दूसरा लाल किला !

दरभंगा बस स्टैंड के समीप स्थित दरभंगा राज का किला , सामने वाली सड़क से गुजरने वालों का ध्यान बरबस ही खीच लेता हैं | दरभंगा के महाराज का यह किला उत्तर बिहार के दुर्लभ और आकर्षक इमारतों में से एक है | भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने १९७७-७८ में इस किले का सर्वेक्षण […]

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bhardutiya_mithila

क्यों मनाया जाता है मिथिला में भातृ द्वितीया पर्व !

भैया दूज कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के द्वितीया के दिन मनाया जाता है | अर्थात दीपावली के दो दिन बाद इस पर्व को मनाया जाता है | भैया दूज को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है जैसे – भातृ द्वितीया , यम दूज , भाई दूज | मिथिलांचल में इस पर्व को भर […]

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Cultural relations between mithila and braj

मिथिला वासी और ब्रजवासी के पारस्परिक संबंधों की पुनर्स्थापना

मुग़ल शासक औरंगजेब ने मिथिला सहित सम्पूर्ण भारत वर्ष पर अपने शासन काल में अत्याचार किया और उसके अत्याचार एवं असहिष्णुता के कारण बहुतों मिथिलावासी मिथिला से पलायन कर अन्य प्रदेशों में जा कर बस गए | ब्रज प्रदेश में रहने वाले प्रवासी मैथिलों का एवं मिथिला वासी मैथिलों का आवागमन भी बंद हो गया […]

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